क्यों दिया युधिष्ठिर ने समूची नारी जाति को श्राप दिया ?

क्यों दिया युधिष्ठिर ने समूची नारी जाति को श्राप
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युधिष्ठिर के एक श्राप को आज भी भुगत रही है नारी जाति  / युधिष्ठिर का स्त्री जाति को श्राप क्या था ?


महाभारत कथा । जब अर्जुन द्वारा सूर्य पुत्र कर्ण का वध का समाचार हर जगह फ़ैल गया और जब यह समाचार कुंती को प्राप्त हुआ तो वह कुरुक्षेत्र में जाकर कर्ण के शव पर उसकी मृत्यु का विलाप करती हैं।  अपनी माता को कर्ण के शव पर विलाप करते देख युधिष्ठिर ने अपनी माता कुन्ती से प्रश्न किया कि आप हमारे शत्रु की मृत्यु पर विलाप क्यों कर रहीं है। आपको तो ख़ुशी होना चाहिए हैं कि आपका पुत्र विजयी हुआ हैं , आप अपने असुवो को इस तरह अपमानित मत करो माता इस सूत्र पुत्र के लिए।



तब कुन्ती ने युधिष्ठिर से कहा कि कर्ण तुम्हरा दुश्मन नहीं था। और यह कोई राधे या सूत्र पुत्र नहीं था। कर्ण ज्येष्ठ पांडव और तुम सबका ज्येष्ठ भ्राता था। यह बात सुनकर युधिष्ठिर और पांडव को अत्यन्त दुःख होता हैं । युधिष्ठिर ने अपनी माता कुन्ती से कहा कि आपने इतनी बड़ी बात हमसे क्यों छिपाई, आपने हमें हमारे ज्येष्ठ भ्राता का ही हत्यारा बना दिया, क्यों माते क्यों माते। 



युधिष्ठिर और वंहा समक्ष सारे लोग कर्ण के मृत्यु पर विलाप करने लगे , उसी समय युधिष्ठिर ने अपनी माता से कहा ये माते आपने हमसे इतनी बड़ी बात छुपाई हैं , इसलिए आज मैं समस्त नारी जाति को यह श्राप देता हूं कि इसके उपरांत कोई भी नारी किसी बात, भेद / रहस्य को अपने ह्रदय में नहीं छिपा सकेंगी। 


नोट :- ऐसी मान्यता हैं की धर्मराज युधिष्ठिर के इसी श्राप के कारण स्त्रियां कोई भी बात छिपा नहीं सकतीं।


युधिष्ठिर ने क्यों दिया नारियों को श्राप?

जब युधिष्ठिर ने अपनी माता कुन्ती से प्रश्न किया कि आप हमारे शत्रु की मृत्यु पर विलाप क्यों कर रहीं है। तब कुन्ती ने युधिष्ठिर से कहा कि कर्ण तुम्हरा दुश्मन नहीं तुम्हारा बड़ा भाई था। यह बात सुनकर युधिष्ठिर और पांडव को अत्यन्त दुःख होता हैं । उसी समय युधिष्ठिर ने अपनी माता से कहा ये माते आपने हमसे इतनी बड़ी बात छुपाई हैं , इसलिए आज मैं समस्त नारी जाति को यह श्राप देता हूं कि इसके उपरांत कोई भी नारी किसी बात, भेद / रहस्य को अपने ह्रदय में नहीं छिपा सकेंगी। 


युधिष्ठिर ने कुंती को क्या श्राप दिया?

युधिष्ठिर ने अपनी माता से कहा ये माते आपने हमसे इतनी बड़ी बात छुपाई हैं , इसलिए आज मैं समस्त नारी जाति को यह श्राप देता हूं कि इसके उपरांत कोई भी नारी किसी बात, भेद / रहस्य को अपने ह्रदय में नहीं छिपा सकेंगी। 



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